मिड डे मील योजना 2021, मध्याह्न भोजन, लाभार्थी (Mid Day Meal Scheme in Hindi)

    मिड डे मील योजना 2021, मध्याह्न भोजन, सुबह का नाश्ता, लाभार्थी, निबंध, महत्व, मेन्यू, कब शुरू हुई, पोषक तत्व, नुकसान, लाभ, पात्रता, हेल्पलाइन नंबर (Mid Day Meal Scheme in Hindi) (Logo, Beneficiary, Objective, Benefit, Dwarback, UPSC, Start Date, Eligibility, Helpline Number)

    खराब आर्थिक स्थिति की वजह से आज भी कई बच्चों को कठिन हालातों में जीवन गुजारना पड़ता है। जिसका सीधा असर उनकी शिक्षा पर भी पड़ता है, परिणामस्वरूप कई बच्चे स्कूल ही नहीं जा पाते। लेकिन पिछले कुछ दशकों से देश के विभिन्न राज्यों में मिड डे मील योजना के तहत सरकार द्वारा गरीब एवं आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को भी शिक्षा के अवसर प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। आज हम इस लेख में आपको मिड डे मील योजना क्या है? इसे क्यों शुरू किया गया था? और इससे जुड़ी सभी जानकारियां देंगे।

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    Table of Contents

    मिड डे मील योजना 2021 (Mid Day Meal Scheme)

    योजना का नामMid day meal Yojana
    योजना की शुरुआतवर्ष 1995
    लांच किया गयाकेंद्रीय सरकार द्वारा
    संबंधित मंत्रालयमानव संसाधन विकास मंत्रालय
    लाभार्थीसरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे
    आधिकारिक वेबसाइटयहाँ क्लिक करें
    हेल्पलाइन नंबर1800-180-8007

    Mid Day Meal Yojana क्या है

    मिड डे मील योजना को भारत में शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। मिड डे मील योजना के तहत सरकारी स्कूलों में मध्याहन भोजन दिया जाता है। मध्यान भोजन प्रदान करके सरकार बच्चों को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित करती है साथ ही साथ उन्हें स्वस्थ्य आहार प्रदान करके बच्चों में फैलने वाले  कुपोषण से रोकने का प्रयास करती हैं। मिड डे मील के अंतर्गत बच्चों को आहार में विभिन्न प्रकार का भोजन दिया जाता है।

    Mid Day Meal Yojana की पूरी जानकारी

    गरीब बच्चे जो सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं उनके पोषण का ख्याल रखते हुए सरकार ने इस योजना को जारी किया है। योजना को जारी करने के साथ-साथ सरकार ने बच्चों को सीधा लाभ देने के लिए उनके बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने की भी बात जारी की है जिसे केंद्रीय सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इस योजना के अंतर्गत 11 करोड़ 80 लाख छात्रों को लाभ पहुंचाया जाएगा। सरकार ने इस बात को भी स्पष्ट किया है कि इस योजना के अंतर्गत केवल कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को ही सम्मिलित किया जाएगा। इस योजना को पूरे भारत में चलाने के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार ने मिलकर 200 करोड रुपए का बजट तैयार किया है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस विषय में अपनी राय प्रदर्शित करते हुए कहा है कि इस योजना के तहत दूध के खपत को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

    मिड डे मील योजना का बजट (Budget)

    शायद आपको इस बात की जानकारी होगी कि हर साल 5 ईयर प्लान बनाने के दौरान सरकार मिड डे मील योजना की भी बजट तैयार करती है। अब तक कई सारे फाइव ईयर प्लान जारी किए गए हैं उनकी जानकारी नीचे दर्शाई गई है –

    सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले इस फाइव ईयर प्लान में 9 अरब रुपए की बजट राशी तय की गई है।

    जबकि 12वें फाइव ईयर प्लान में सरकार ने मिड डे मील योजना को सपोर्ट करने के लिए 901.55 अरब रुपए का बजट बनाया था।

    जैसा कि देखा जा सकता है कि मिड डे मील योजना पर बजट की राशि काफी ज्यादा है इसी कारण इस राशि को केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों ही आपस में बाटेंगी। जिसमें केंद्र सरकार को अपनी तरफ से 60% भाग जबकि राज्य सरकार को बजट का 40% भाग देना होता है।

    इसके अलावा सरकार ने मिड डे मील बजट के लिए और भी कई सारी बातें स्पष्ट की है जैसे इस योजना के अंतर्गत केंद्रीय सरकार भोजन व अनाज प्रदान करेगी जबकि राज्य सरकार भोजन बनाने के साथ भोजन डिस्ट्रीब्यूशन करने का कार्य करेंगे मतलब यह है कि राज्य सरकार को केवल श्रम का ख्याल रखना है।

    मिड डे मील योजना क्यों शुरू की गई

    कन्वेंशन ऑन द राइट्स ऑफ द चाइल्ड एक संधि है जिसके अंतर्गत बच्चों के अधिकार को सुरक्षित रखा जाता है। इस संधि में कई सारे देश जुड़े हुए हैं और हमारा देश भी इसके अंतर्गत शामिल है। भारत में गरीब बच्चों में कुपोषण की काफी समस्या देखने को मिलती है इस कारण बच्चों को पोषण प्रदान करने के लिए भारतीय सरकार ने इस योजना को साल 2013 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत जारी किया है।

    मिड डे मील योजना प्रोग्राम कब शुरू हुआ

    मिड डे मील प्रोग्राम सर्वप्रथम 1995 में शुरू हुआ था। इस प्रोग्राम के तहत पहले दो हजार ब्लॉक में मिड डे मील की सुविधा प्रदान की गई थी। जब यह प्रोग्राम अच्छे से सफल हो गया तब साल 2004 में इस प्रोग्राम को पूरे भारतवर्ष के स्कूलों में लागू कर दिया गया था।

    Mid Day Meal Yojana पात्रता नियम (Eligibility)

    इस योजना का लाभ केवल वही लोग प्राप्त कर सकते हैं जिनके पास यह सारी पात्रता है –

    • केवल कक्षा एक से कक्षा आठ की छात्र छात्राएं ही मिड डे मील योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त कर सकता है।
    • केवल सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थी ही मिड डे मील योजना का लाभ प्राप्त कर पाएंगे।
    • प्राइमरी व सेकंड प्राइमरी कक्षा में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थी इस प्रोग्राम का हिस्सा बनने में सक्षम होंगे।

    मिड डे मील योजना की विशेषतायें

    मिड डे मील योजना को लागू करके सरकार निम्नलिखित उद्देश्य को पूरा करना चाहती है –

    बच्चों के शरीर का बेहतर विकास

    देश की आबादी में आज भी कई लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं जिसके कारण उन्हें दो वक्त की रोटी भी नहीं मिल पाती जिसके कारण का शरीर सही तरह से विकसित नहीं हो पाता है लेकिन इस योजना के बाद सरकार बच्चों के विकास में सहायता प्रदान कर पाएगी।

    ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल आए

    इस योजना को लागू करने के पीछे सरकार का और एक बहुमूल्य उद्देश्य यह है कि सरकार इस योजना के अंतर्गत बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं ताकि उनकी शिक्षा और विकास में  भूख बाधा न बन सके

    विशेषतः गरीब बच्चों को खाना प्रदान करना

    इस योजना के अंतर्गत सरकार स्कूल के दिनों में दो बच्चों को खाना देते है लेकिन गर्मियों की छुट्टियों में जब स्कूल बंद होती है तब सूखा प्रदान क्षेत्रों में स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को भोजन दिया जाता है। 

    Mid Day Meal Yojana दिशा निर्देश

    मिड डे मील योजना को जिन स्कूलों में लागू किया गया है उन सभी स्कूलों के लिए कुछ गाइडलाइंस भी जारी किए गए हैं जिसे फॉलो करना हर स्कूल की जिम्मेदारी है। इन स्कूलों में फॉलो किए जाने वाले दिशानिर्देशक की जानकारी नीचे बताई की गई है –

    • पहली गाइडलाइन – मिड डे मील योजना के अंतर्गत स्कूल में प्रदान किए जाने वाले भोजन को केवल रसोई घर में ही बनाया जाना होगा। जिन स्कूलों में रसोई घर की सुविधा नहीं है। उन्हें इस योजना के अंतर्गत सम्मिलित नहीं किया जाएगा।
    • दूसरी गाइडलाइन – स्कूल को यह भी देखना होगा कि रसोई घर के पास बच्चों की कोई क्लास ना चल रही हो। क्योंकि इससे बच्चे को परेशानी हो सकती है।
    • तीसरी गाइडलाइन – स्कूल में भोजन बनाते समय जिन इंधनो का प्रयोग होता है। उन इंधनो को सुरक्षित जगह में रखना चाहिए ताकि बच्चे वहां तक ना पहुंचे।
    • चौथी गाइडलाइन – मिड डे मील योजना के अंतर्गत जो भी भोजन तैयार किए जाएंगे। वह साफ और सुरक्षित ढंग से बनाए जाने चाहिए ताकि बच्चों को पौष्टिक भोजन प्राप्त हो।
    • पांचवी गाइडलाइन – मिड डे मील के अंतर्गत जो भोजन बच्चों को दिया जाएगा। वह अच्छे अनाज व सब्जियों से बनाया जाना चाहिए। खराब भोजन देने पर इसका बुरा प्रभाव बच्चों पर पड़ सकता हैं।
    • छठवीं गाइडलाइन – मिड डे मील के अंतर्गत जिन सब्जियों व अनाजों का प्रयोग होता है उन्हें साफ-सुथरे जगह पर रखना चाहिए।
    • सातवीं गाइडलाइन – मिड डे मील के लिए जब स्कूल में खाना तैयार किया जाएगा तो उसका सबसे पहला ट्रायल दो से तीन लोग करेंगे। जिसमें से 1 शिक्षक होना बेहद ही आवश्यक है।
    • आठवीं गाइडलाइन – स्कूल में जिस तरह से भोजन तैयार किया जाएगा उतने ही साफ तरह से बच्चों को भोजन डिसटीब्यूट भी किया जाना आवश्यक है।

    मतलब यह है कि इस योजना के अंतर्गत स्कूलों का शामिल होना ही काफी नहीं है। इसके अलावा भी स्कूल को बहुत सारी चीजों का ख्याल रखना होगा।

    मिड डे मील योजना भोजन पोषक तत्व

    सरकार ने इस योजना के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाले भोजन के बारे में भी कुछ दिशानिर्देश जारी की है –

    सरकार ने स्कूलों के लिए स्पष्ट रूप से गाइडलाइन जारी की है कि कक्षा 1 से पांच तक के बच्चों के भोजन में 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन होनी जरूरी है।

    कक्षा छठवीं से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए ऐसा भोजन तैयार करना होगा जिसमें कम से कम 700 ग्राम कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन होनी चाहिए।

    Mid Day Meal Yojana भोजन की तालिका

    अनाजसामग्री में मात्रा
    चावल / गेहूंप्राइमरी कक्षाओं के लिए 100 ग्राम   सेकेंडरी कक्षाओं के लिए 150 ग्राम
    दालप्राइमरी कक्षाओं के लिए 20 ग्राम   सेकेंडरी कक्षाओं के लिए 30 ग्राम
    सब्जियांप्राइमरी कक्षाओं के लिए 50 ग्राम   सेकेंडरी कक्षाओं के लिए 75 ग्राम
    तेल और वसाप्राइमरी क्लास के लिए 5 ग्राम   सेकेंडरी क्लास के लिए 7.5 ग्राम

    प्राइमरी कक्षा में एक से पांचवी क्लास के बच्चों को सम्मिलित किया जाता है और सेकेंडरी कक्षा में छठवीं से आठवीं के बच्चों को सम्मिलित किया जाता है।

    मिड डे मील योजना के फायदे (Benefit)

    मिड डे मील योजना के फायदे तक आप इस आर्टिकल को पढ़कर समझ चुके होंगे क्योंकि इस योजना के फायदे उसके उद्देश्य में ही छिपे हुए हैं। बच्चों को अच्छा भोजन प्रदान करना! स्कूल आने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करना! देश में व्याप्त पोषण की समस्या को कम करना मिड डे मील योजना के सबसे बड़े फायदे हैं।

    मिड डे मील के नुकसान (Drawback)

    जहां मिड डे मील योजना के अंतर्गत बहुत से लाभ प्रदान किए गए हैं। वहीँ इस योजना का बहुत से लोग बड़े ही गलत तरीके से उपयोग कर रहे हैं और भ्रष्टाचार व घोटाले को जन्म दे रहे हैं। मिड डे मील योजना में शामिल होने वाले कई सारे विधालयों में निम्न क्वालिटी का भोजन दिया जाता है। जिससे बच्चों की तबीयत भी कई बार खराब हो जाती है यह मीड डे मील योजना का सबसे बड़े नुकसान है।

    इतना ही नहीं इस योजना के अंतर्गत जो रुपए स्कूलों को दिए जाते हैं उनमें से ज्यादातर पैसे स्कूल अपने जेब में रख लेते हैं और शेष पैसों से भोजन तैयार किया जाता है। जिससे देश में भ्रष्टाचार की समस्या बढ़ रही हैं।

    FAQ

    Q : मिड डे मील कब आई ?

    ANS : साल 1995

    Q : MDM का फुल फॉर्म क्या है ?

    ANS : Mid Day Meal

    Q : मिड डे मील योजना का लक्ष्य क्या है ?

    ANS : बच्चों को पौष्टिक खाना प्रदान करना।

    Q : मिड डे मील योजना के अंतर्गत काम करने वाले लोगों की सैलरी कितनी है?

    ANS : इस योजना के तहत कार्य करने वाले व्यक्ति की मासिक आय 1500 रुपए हैं।

    Q : मिड डे मील के नुकसान क्या है ?

    ANS : सरकारी व्यवस्था अच्छी ना होने पर बच्चों को गंदा भोजन दिया जाता है।

    Q : मिड डे मील में कितनी राशि खर्च की जा रही है ?

    ANS : मिड डे मील योजना के अंतर्गत स्कूल के बच्चों को एक समय का खाना प्रदान करने के लिए अनुमानित राशि 6 से 9 रूपए तक होती है।

    Q : मिड डे मील की सैलरी कितनी है ?

    ANS : मिड डे मील के अंतर्गत जो लोग काम करते हैं उनकी सैलरी 1000 से 20000 तक हो सकते हैं।

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